सलमान खान salman khan ne personality publicity rights ki suraksha ke liye delhi high court ka darvaja khatkhataya
बॉलीवुड सुपरस्टार सलमान खान ने दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की
नई दिल्ली। बॉलीवुड सुपरस्टार सलमान खान ने अपने व्यक्तित्व अधिकारों (Personality Rights) और पब्लिसिटी राइट्स की सुरक्षा के लिए दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की है। डिजिटल युग में तेजी से बढ़ते एआई डीपफेक, फर्जी प्रोफाइल और गलत ब्रांड एंडोर्समेंट के मामलों ने पिछले कुछ महीनों में कई भारतीय हस्तियों को कानूनी संरक्षण के लिए कोर्ट का सहारा लेने पर मजबूर किया है। इसी क्रम में सलमान खान ने भी अपनी कानूनी लड़ाई शुरू की है। इस मामले की सुनवाई 11 दिसंबर को निर्धारित है।
सलमान खान का क्या है पूरा मामला?
पिछले कुछ महीनों में सोशल मीडिया पर सलमान खान के नाम, तस्वीरों और आवाज का कई बार गलत इस्तेमाल देखने को मिला है। एक्टर की ओर से दायर याचिका में दावा किया गया है कि—
- सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर उनके नाम पर फर्जी प्रोफाइल बनाए जा रहे हैं
- उनकी तस्वीरें और वीडियो को एआई की मदद से डीपफेक बनाकर प्रसारित किया जा रहा है
- बिना अनुमति के कई ऑनलाइन पेज और चैनल उनके नाम का उपयोग कर कमाई कर रहे हैं
- कुछ ई-कॉमर्स साइटों पर सलमान खान से जुड़े होने का दावा करके नकली उत्पाद बेचे जा रहे हैं
- ऐसे कई विज्ञापन प्रचारित किए जा रहे हैं जिनमें ऐसा दिखाया जाता है कि वे उस ब्रांड के प्रमोटर हैं, जबकि वास्तविकता में ऐसा नहीं है
सलमान की कानूनी टीम का कहना है कि यह सब न केवल उनके व्यक्तित्व अधिकारों का उल्लंघन है, बल्कि इससे अभिनेता की छवि और विश्वसनीयता को नुकसान पहुंच रहा है।

पर्सनैलिटी और पब्लिसिटी राइट्स आखिर क्या होते हैं?
पर्सनैलिटी राइट्स के अंतर्गत किसी भी व्यक्ति विशेषकर सेलिब्रिटी की पहचान से जुड़ी चीजें आती हैं, जैसे:
- नाम
- आवाज
- चेहरा
- हाव-भाव
- बॉडी लैंग्वेज
- निजी स्टाइल
- हस्ताक्षर इत्यादि
पब्लिसिटी राइट्स का अर्थ होता है कि बिना किसी की अनुमति के उसकी पहचान या पर्सनैलिटी का उपयोग कर कमाई नहीं की जा सकती।
डिजिटल दुनिया में डीपफेक, एआई-जनरेटेड वीडियो और एडिटेड ऑडियो ने इस खतरे को कई गुना बढ़ा दिया है, जिसके चलते सेलेब्रिटीज अब कानूनी सुरक्षा को लेकर और अधिक सतर्क हो गए हैं।
हाल के महीनों में बढ़े ऐसे मामले:
भारत में पर्सनैलिटी राइट्स को लेकर कानूनी कार्रवाइयों में तेज़ी आई है। पहले यह अधिकार केवल सिद्धांतों पर आधारित थे, लेकिन अब हाईकोर्ट ने कई महत्वपूर्ण आदेश देकर इसे मजबूत बनाया है।
- हाल ही में गायिका आशा भोसले ने अपनी आवाज और पहचान के गलत इस्तेमाल के खिलाफ कोर्ट से राहत मांगी थी।
- सुनील शेट्टी ने भी फर्जी प्रोफाइल और भ्रामक विज्ञापनों के खिलाफ याचिका दायर की थी।
- अक्षय कुमार ने अपने नाम और फोटो का बिना अनुमति उपयोग कर किए जा रहे स्कैम प्रमोशन को रोकने के लिए कानूनी कदम उठाए थे।
कई मामलों में कोर्ट ने निर्देश दिया कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म, ई-कॉमर्स साइटें और इंटरमीडियरी कंपनियां ऐसे कंटेंट को तुरंत हटाएं और आगे निगरानी बढ़ाएं।
सलमान खान का मामला क्यों महत्वपूर्ण माना जा रहा है?
सलमान खान भारत ही नहीं, बल्कि वैश्विक स्तर पर भी एक बड़े फैनबेस रखने वाले स्टार हैं। उनके नाम से जुड़ी लोकप्रियता का कई लोग गलत फायदा उठाने की कोशिश करते हैं।
रिपोर्ट्स के अनुसार, कुछ ऑनलाइन फर्जी विज्ञापनों में सलमान के नाम का उपयोग कर क्रिप्टो स्कैम और फेक हेल्थ प्रोडक्ट्स का प्रमोशन भी किया गया था, जिससे उनके फैंस को भ्रमित करने का खतरा बढ़ गया था।
याचिका में यह भी दावा किया गया है कि अभिनेता की निजी छवि को धूमिल करने के उद्देश्य से कई डीपफेक वीडियो प्रसारित किए गए, जिनकी वजह से उनके कानूनी अधिकारों का गंभीर उल्लंघन हुआ।
एक्टर क्या चाहते हैं?
सलमान खान ने कोर्ट से मांग की है कि—
- उनकी पहचान, नाम, आवाज और पर्सनैलिटी से जुड़े किसी भी तत्व का बिना अनुमति उपयोग करने पर रोक लगाई जाए
- सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को निर्देश दिया जाए कि फर्जी अकाउंट्स और भ्रामक कंटेंट को तुरंत हटाया जाए
- एआई से बने डीपफेक वीडियो और फोटो को प्रसारित करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाए
- ई-कॉमर्स वेबसाइटों को फर्जी एंडोर्समेंट वाले उत्पाद तुरंत डिलिस्ट करने के निर्देश दिए जाएँ.
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सेलीब्रिटीज के लिए एक बड़ा मिसाल बन सकता है फैसला
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि कोर्ट सलमान खान को राहत देता है, तो यह अन्य कलाकारों और सार्वजनिक व्यक्तित्वों के अधिकारों को और मजबूत करेगा।
डिजिटल दुनिया में पहचान के दुरुपयोग को रोकना अब समय की मांग है, क्योंकि एआई-जनरेटेड कंटेंट के कारण गलत जानकारी और धोखाधड़ी का खतरा लगातार बढ़ रहा है। 11 दिसंबर को होने वाली सुनवाई में यह देखा जाएगा कि कोर्ट इस मामले को किस दिशा में ले जाता है। उद्योग से जुड़े लोग इसे भविष्य के बड़े कानूनी फैसलों का आधार मान रहे हैं।
