मस्जिद के मोअज्जिन पर भड़काऊ भाषण का मुकदमा
भड़काऊ भाषण: जमीयत ने पुलिस कार्रवाई पर जताया कड़ा विरोध, दोनों पक्षों की जांच की मांग तेज, लाउडस्पीकर विवाद से गरमाया माहौल
मुजफ्फरनगर। शहर के बझेड़ी रोड स्थित मदीना मस्जिद से जुड़े विवाद ने एक बार फिर पूरे जिले का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। मस्जिद से लाउडस्पीकर हटाने के दौरान पुलिस एवं मस्जिद प्रबंधन के बीच हुई झड़प के बाद अब मस्जिद के मोअज्जिन मौहम्मद इरफान के खिलाफ भड़काऊ भाषण देने के आरोप में मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। बयान का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से फैलते ही पुलिस ने यह कदम उठाया, जबकि दूसरी ओर जमीयत उलेमा ए हिंद ने इस कार्रवाई को पक्षपातपूर्ण बताते हुए कड़ा विरोध दर्ज कराया है।
लाउडस्पीकर हटाने के दौरान शुरू हुआ विवाद
जानकारी के अनुसार, 10 दिसंबर की सुबह फजिर की नमाज के समय थाना सिविल लाइन की चौकी कच्ची सड़क के इंचार्ज उप निरीक्षक अपने कुछ पुलिसकर्मियों के साथ मदीना मस्जिद पहुंचे थे। आरोप है कि मस्जिद प्रबंधन की सहमति के बिना जबरन लाउडस्पीकर हटाने की कोशिश की गई, जिसका मोअज्जिन और अन्य लोगों ने विरोध किया। इसी बीच कहासुनी बढ़ गई और मामूली धक्का-मुक्की भी हो गई।
मस्जिद पक्ष का आरोप है कि पुलिसकर्मियों ने न केवल लाउडस्पीकर उतारने पर जोर डाला, बल्कि मोअज्जिन इरफान के साथ मारपीट और अभद्रता भी की। घटना का एक वीडियो सामने आया जिसमें इरफान के साथ धक्का-मुक्की होती दिखाई देती है। यह वीडियो फैलते ही मामले को लेकर आक्रोश बढ़ गया।
मोअज्जिन का बयान वायरल—पुलिस ने माना भड़काऊ भाषण
झड़प के बाद मोअज्जिन इरफान ने एसएसपी कार्यालय पर मीडिया से बात करते हुए पुलिसकर्मियों पर मारपीट और गाली-गलौज का आरोप लगाया। इसी दौरान उन्होंने कुछ टिप्पणियाँ ऐसे शब्दों में कर दीं जो पुलिस के अनुसार भड़काऊ थीं और सार्वजनिक माहौल को बिगाड़ सकती थीं। उनका यह बयान भी एक अलग वीडियो के रूप में वायरल हो गया।
थाना सिविल लाइन पुलिस ने इसी बयान के आधार पर मोअज्जिन के खिलाफ मामला दर्ज किया है। थाना प्रभारी इंस्पेक्टर आशुतोष कुमार के अनुसार, “मौहम्मद इरफान द्वारा सार्वजनिक रूप से पुलिस बल के खिलाफ उत्तेजक टिप्पणी की गई, जो कानून व्यवस्था के लिए गंभीर मानी गई। इसलिए एफआईआर दायर कर जांच शुरू कर दी गई है।”
जमीयत उलेमा ए हिंद ने उठाए सवाल
दूसरी ओर, जमीयत उलेमा ए हिंद की जिला इकाई ने पुलिस की कार्रवाई को एकतरफा करार दिया है। संगठन के जिलाध्यक्ष मौलाना मुकर्रम अली कासमी ने पदाधिकारियों के साथ एसएसपी संजय वर्मा से मुलाकात की और आरोप लगाया कि पुलिस केवल मस्जिदों पर लगे लाउडस्पीकर हटाने पर जोर दे रही है, जबकि जिस तरीके से कार्रवाई की जा रही है, वह “जबरन” और “अनुचित” है।
मौलाना मुकर्रम ने कहा,
“हमने भी पुलिसकर्मियों द्वारा मोअज्जिन के साथ किए गए दुर्व्यवहार की शिकायत दी थी, लेकिन अभी तक संबंधित पुलिसकर्मियों पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। दूसरी ओर, सिर्फ बयान वायरल होने पर मोअज्जिन पर मुकदमा दर्ज कर दिया गया, जो निष्पक्षता पर सवाल उठाता है।”
जमीयत ने पूरे मामले की स्वतंत्र जांच कराने की मांग की है ताकि दोनों पक्षों के आरोपों की गंभीरता से पड़ताल हो सके।
भड़काऊ भाषण : तालमेल और संवाद की कमी से बढ़ा तनाव
स्थानीय लोग और धार्मिक संगठनों का मानना है कि मस्जिदों में लगे लाउडस्पीकरों को लेकर हाल के दिनों में पुलिस की कार्रवाइयों और कुछ स्थानों पर संवाद की कमी के कारण तनावपूर्ण हालात पैदा हुए हैं। कई जगहों पर लाउडस्पीकर हटाने को लेकर स्थानीय समुदायों में गलतफहमी बढ़ी है, जिसे समय रहते वार्ता के माध्यम से दूर किया जा सकता था।
मदीना मस्जिद के मामले में भी यही कहा जा रहा है कि यदि पुलिस और मस्जिद पक्ष के बीच पहले से बातचीत कर ली जाती, तो विवाद इतना नहीं बढ़ता कि एफआईआर और वायरल वीडियो तक मामला पहुंचता।
पुलिस का पक्ष—नियमित जांच और शांति बनाए रखना
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि धार्मिक संस्थानों में लगे लाउडस्पीकरों से संबंधित नियमानुसार कार्रवाई की जा रही है, और किसी भी स्थान पर बिना अनुमति लगाए गए उपकरणों पर क्रमवार कार्यवाही की जा रही है। पुलिस ने स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य केवल कानूनी मानकों का पालन कराना है, न कि किसी समुदाय विशेष को निशाना बनाना।
एसएसपी कार्यालय सूत्रों के अनुसार, “किसी भी तरह की एकतरफा कार्रवाई नहीं की जाएगी। दोनों पक्षों की शिकायतों की जांच हो रही है और यदि किसी पुलिसकर्मी की गलती सामने आती है तो विभागीय कार्रवाई भी की जाएगी।”
स्थानीय माहौल पर असर, सियासी हलचल भी तेज
घटना का वीडियो वायरल होते ही स्थानीय राजनीति भी सक्रिय हो गई है। कई सामाजिक संगठनों ने पुलिस पर पक्षपात का आरोप लगाया है, जबकि कुछ समूहों ने मोअज्जिन के बयान को कानून व्यवस्था के खिलाफ करार देते हुए पुलिस कार्रवाई को सही बताया है। सोशल मीडिया पर भी इस विषय पर मिश्रित प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं।
शहर में फिलहाल पुलिस फोर्स सतर्क है और संवेदनशील क्षेत्रों में अतिरिक्त पेट्रोलिंग बढ़ा दी गई है ताकि किसी अफवाह या तनाव की स्थिति को रोका जा सके।
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आगे क्या—निष्पक्ष जांच ही समाधान
घटना से जुड़े दोनों वीडियो सोशल मीडिया पर लगातार चर्चा का विषय बने हुए हैं। अब देखने वाली बात यह होगी कि पुलिस जांच क्या निष्कर्ष निकालती है—क्या मोअज्जिन के खिलाफ दर्ज मुकदमे में ठोस आधार मिलेगा या पुलिसकर्मियों पर लगे आरोप भी जांच में साबित होंगे।
जमीयत ने स्पष्ट कहा है कि वह मामले को लेकर कानूनी लड़ाई भी लड़ सकती है और पीड़ित मोअज्जिन को हर संभव सहयोग देगी। उधर, पुलिस प्रशासन ने भी साफ किया है कि मामले में किसी भी तरह का पक्षपात नहीं होगा।
