जमीयत उलेमा ज़िला लुधियाना की मासिक बैठक में लिए गए कई अहम फैसले
लुधियाना। जमीयत उलेमा ज़िला लुधियाना की कार्यकारिणी समिति की एक महत्वपूर्ण बैठक ज़िला कार्यालय, मदनी मदरसा, राहों रोड, मेहरबान चुंगी में आयोजित हुई। बैठक की अध्यक्षता क़ारी़ ग़यूर अहमद (अध्यक्ष, जमीयत उलेमा ज़िला लुधियाना) ने की जबकि संचालन की ज़िम्मेदारी मौलाना मुहम्मद नसीम (जनरल सेक्रेटरी, जमीयत उलेमा ज़िला लुधियाना) ने बख़ूबी निभाई। बैठक का शुभारंभ क़ारी मुहम्मद रमज़ान (अध्यक्ष, जमीयत उलेमा हलक़ा पंजाबी बाग़) की प्रभावशाली क़ुरआन तिलावत से हुआ।
इस अवसर पर मुफ़्ती शुऐब आलम (नाज़िम इस्लाह-ए-मुआशरा, जमीयत उलेमा ज़िला लुधियाना) ने हाल के महीनों में पंजाब में आए बाढ़ के दौरान जमीयत उलेमा ज़िला लुधियाना द्वारा की गई राहत व सेवा गतिविधियों पर विस्तार से प्रकाश डाला और सभी कार्यकर्ताओं के प्रयासों व समर्पण की सराहना करते हुए उनका आभार व्यक्त किया। साथ ही उन्होंने वित्तीय सहयोग से संबंधित आय–व्यय का पूरा विवरण बैठक में प्रस्तुत किया, जिस पर सभी सदस्यों ने संतोष व्यक्त किया।
ज़िला लुधियाना के सभी हल्क़ों को और अधिक सक्रिय व संगठित बनाने के उद्देश्य से दस सदस्यीय समिति के गठन का निर्णय लिया गया। यह प्रस्ताव भाई मेहरदीन सैफ़ी साहब (सदस्य, केंद्रीय जमीयत उलेमा हिंद) द्वारा प्रस्तुत किया गया, जिसे सर्वसम्मति से स्वीकार कर लिया गया।

अध्यक्षीय भाषण में क़ारी़ ग़यूर अहमद ने मदरसों और मक़ातिब के ज़िम्मेदारों को संबोधित करते हुए कहा कि इस्लामी मदरसों की शैक्षणिक और प्रशासनिक व्यवस्था को मज़बूत व स्थिर बनाना हम सबकी सामूहिक ज़िम्मेदारी है, क्योंकि क़ौम के ये बच्चे हमारे पास एक अमानत हैं। उन्होंने इस बात पर भी ज़ोर दिया कि मदरसों के सरकारी पंजीकरण और आवश्यक कानूनी दस्तावेज़ों को पूर्ण और मज़बूत बनाना समय की अहम ज़रूरत है।
इसी क्रम में हाफ़िज़ मुहम्मद हाशिम और हाफ़िज़ मुहम्मद नाज़िम (उपाध्यक्षगण) ने इस्लाह-ए-मुआशरा से संबंधित महत्वपूर्ण सुझाव प्रस्तुत किए और समाज की वर्तमान स्थिति पर चर्चा करते हुए कहा कि आज समाज में अश्लीलता, बेहयाई और अन्य नैतिक बुराइयाँ तेज़ी से बढ़ रही हैं, जिनके उन्मूलन के लिए संगठित और गंभीर प्रयास आवश्यक हैं।
शोबा-ए-इस्लाह-ए-मुआशरा के अंतर्गत माह जनवरी में ज़िले के विभिन्न हल्क़ों में चार सुधारात्मक कार्यक्रम आयोजित करने का निर्णय लिया गया। इस अवसर पर उपस्थित सभी हल्क़ा ज़िम्मेदारों ने अपने-अपने सुझाव प्रस्तुत किए, जिन पर विचार-विमर्श के बाद कई प्रस्ताव पारित किए गए।
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बैठक का समापन विशेष अतिथि हज़रत मौलाना मुहम्मद राशिद (मुबल्लिग़, दारुल उलूम देवबंद) की प्रभावशाली दुआ के साथ हुआ।
इस बैठक में मुफ़्ती मुहम्मद ख़ालिद, मुफ़्ती मुहम्मद साक़िब (अध्यक्ष, शहर), मौलाना मुहम्मद आसिम, क़ारी मुहम्मद रमज़ान, क़ारी अबसार, मुहम्मद अख़्तर (ख़ज़ांची), मुहम्मद यूनुस (सहायक), मेहरबान इदरीसी, मुहम्मद याक़ूब भामिया, मुहम्मद नदीम सैफ़ी, मुहम्मद सलीम (ऑफ़िस सेक्रेटरी), नूर मुहम्मद अंसारी, अब्दुल हसीब, मुहम्मद आबिद तथा अन्य कार्यकारिणी सदस्य उपस्थित रहे।
