तेल संकट के बीच दिल्ली में बड़ा बदलाव: वर्क फ्रॉम होम, ऑनलाइन मीटिंग और सार्वजनिक परिवहन पर जोर
नई दिल्ली। देश और दुनिया में ऊर्जा संसाधनों को लेकर बढ़ती चिंता तेल संकट के बीच दिल्ली सरकार ने तेल बचत और ऊर्जा संरक्षण को लेकर कई अहम कदम उठाने की घोषणा की है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने राजधानी में ईंधन की खपत कम करने, स्वदेशी विकल्पों को बढ़ावा देने और संसाधनों के बेहतर उपयोग के उद्देश्य से नई व्यवस्था लागू करने का ऐलान किया है। प्रस्तावित फैसलों में सप्ताह में दो दिन वर्क फ्रॉम होम, सरकारी बैठकों का बड़ा हिस्सा ऑनलाइन करना, मंत्रियों की यात्राओं में कटौती और सार्वजनिक परिवहन के उपयोग को बढ़ावा देना शामिल बताया जा रहा है।
इन कदमों का उद्देश्य केवल ईंधन बचाना नहीं बल्कि प्रशासनिक स्तर पर एक उदाहरण प्रस्तुत करना भी माना जा रहा है। इससे पहले भी दिल्ली सरकार वाहन उपयोग कम करने और सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा देने की बात कह चुकी है।
50 प्रतिशत ऑनलाइन बैठकों की तैयारी
नई व्यवस्था के तहत सरकारी बैठकों को अधिक डिजिटल बनाने पर जोर दिया जा रहा है। बताया जा रहा है कि करीब 50 प्रतिशत बैठकों को ऑनलाइन माध्यम से आयोजित करने की योजना बनाई गई है। इससे अधिकारियों और कर्मचारियों की यात्रा कम होगी और ईंधन की खपत पर भी असर पड़ेगा।
कोविड काल के दौरान ऑनलाइन बैठकों और डिजिटल कार्य प्रणाली का इस्तेमाल काफी बढ़ा था। उसके बाद कई सरकारी विभागों और निजी संस्थानों ने पाया कि कई कार्य वर्चुअल माध्यम से भी प्रभावी ढंग से किए जा सकते हैं। अब ऊर्जा संरक्षण की दिशा में उसी मॉडल को नए रूप में देखने की कोशिश की जा रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर बड़े स्तर पर बैठकें ऑनलाइन होती हैं तो इससे ट्रैफिक दबाव में भी कमी आ सकती है और शहर के परिवहन तंत्र पर सकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।
सप्ताह में दो दिन वर्क फ्रॉम होम का प्रस्ताव
राजधानी में कार्यालयों की आवाजाही कम करने के लिए दो दिन वर्क फ्रॉम होम की व्यवस्था को लागू करने पर भी चर्चा तेज है। दिल्ली में इससे पहले भी सीमित स्तर पर वर्क फ्रॉम होम मॉडल अपनाने की बातें सामने आ चुकी हैं, खासकर प्रदूषण और यातायात प्रबंधन के दौरान।
यदि यह व्यवस्था व्यापक स्तर पर लागू होती है तो लाखों कर्मचारियों की रोजाना यात्रा कम हो सकती है। इससे न केवल ईंधन की बचत होगी बल्कि सड़क पर वाहनों की संख्या भी घट सकती है।
हालांकि आवश्यक सेवाओं, स्वास्थ्य विभाग, सुरक्षा एजेंसियों और आपात सेवाओं को इस व्यवस्था से छूट दी जा सकती है।
मंत्री और विधायक अब मेट्रो-बस से करेंगे सफर
सबसे अधिक चर्चा उस फैसले की हो रही है जिसमें मंत्रियों और विधायकों को सार्वजनिक परिवहन के उपयोग के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। जानकारी के अनुसार, कई जनप्रतिनिधि अब मेट्रो और बस जैसी सेवाओं का उपयोग कर सकते हैं। दिल्ली सरकार पहले भी लोगों से कारपूल और सार्वजनिक परिवहन अपनाने की अपील कर चुकी है।
इस कदम को प्रतीकात्मक और व्यावहारिक दोनों रूपों में देखा जा रहा है। एक तरफ इससे ईंधन की बचत होगी तो दूसरी ओर आम लोगों में सार्वजनिक परिवहन के उपयोग को लेकर सकारात्मक संदेश जा सकता है।
नेताओं के काफिले और बड़े आयोजन होंगे सीमित
ऊर्जा बचत अभियान के तहत बड़े सार्वजनिक कार्यक्रमों और गैर-जरूरी सरकारी यात्राओं में भी कटौती की बात सामने आई है। नेताओं के काफिलों में वाहनों की संख्या सीमित करने और अनावश्यक आवाजाही कम करने की योजना पर भी विचार किया जा रहा है।
विशेषज्ञों का कहना है कि बड़े सरकारी काफिले और कार्यक्रमों में बड़ी मात्रा में ईंधन का उपयोग होता है। ऐसे में यदि इसमें कमी आती है तो उसका असर व्यापक स्तर पर दिखाई दे सकता है।
स्वदेशी और ऊर्जा संरक्षण को लेकर नई सोच
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता द्वारा घोषित इन कदमों को केवल प्रशासनिक बदलाव नहीं बल्कि एक सोच के रूप में देखा जा रहा है। दुनिया के कई देशों में ऊर्जा संकट के दौरान सरकारों ने वैकल्पिक कार्य व्यवस्था और सार्वजनिक परिवहन आधारित मॉडल अपनाए हैं।
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दिल्ली जैसे महानगर में जहां रोजाना लाखों वाहन सड़कों पर उतरते हैं, वहां छोटे-छोटे बदलाव भी बड़े परिणाम ला सकते हैं।
अब देखने वाली बात होगी कि इन प्रस्तावित व्यवस्थाओं को किस स्तर पर लागू किया जाता है और आम लोग इनके साथ कितना जुड़ते हैं। लेकिन इतना तय है कि ऊर्जा बचत और संसाधनों के जिम्मेदार उपयोग को लेकर सरकार अब अधिक सक्रिय नजर आ रही है।