नसबंदी sterilization
नसबंदी के नाम पर मौत तीन बच्चों की मां की तड़पती सांसें, चिता की राख से निकली कैंची ने खोले सिस्टम के जख्म
नई दिल्ली। सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था पर भरोसा कर नसबंदी कराने गई तीन बच्चों की मां को क्या पता था कि यह फैसला उसकी जिंदगी का आखिरी पड़ाव बन जाएगा। ऑपरेशन टेबल पर चढ़ते ही लापरवाही की ऐसी श्रृंखला शुरू हुई कि कुछ ही घंटों में वह महिला दर्द से तड़पती रही और अंततः उसकी सांसें थम गईं। सीहोर जिले के भैरुंदा में नसबंदी ऑपरेशन के बाद महिला की मौत का मामला सामने आया है। लेकिन मामला यहीं खत्म नहीं हुआ। अंतिम संस्कार के बाद जब चिता की राख से एक कैंची निकली, तो पूरे गांव में कोहराम मच गया और स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए।
भरोसे की कीमत जान से चुकाई
मृतका तीन बच्चों की मां थी। परिवार सीमित संसाधनों में गुजर-बसर करता था। आशा कार्यकर्ता और स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों की सलाह पर उसने नसबंदी कराने का निर्णय लिया। बताया गया कि यह एक सामान्य प्रक्रिया है, कुछ ही देर में घर लौट आएगी। परिजन उसे सरकारी अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां पहले से कई महिलाएं कतार में थीं। भीड़, अव्यवस्था और जल्दबाजी साफ झलक रही थी।
नसबंदी ऑपरेशन थिएटर की भयावह तस्वीर
परिजनों का आरोप है कि ऑपरेशन से पहले न तो समुचित जांच हुई और न ही जरूरी सावधानियां बरती गईं। ऑपरेशन थिएटर में स्वच्छता के मानक भी सवालों के घेरे में थे। नसबंदी के बाद महिला को तेज दर्द होने लगा। उसने बार-बार शिकायत की, लेकिन स्टाफ ने इसे “सामान्य दर्द” बताकर नजरअंदाज कर दिया। हालत बिगड़ती गई, पेट फूलने लगा, उल्टियां शुरू हो गईं।
नसबंदी ऑपरेशन पर तड़पती रही महिला, सुनवाई नहीं
परिजनों का कहना है कि उन्होंने डॉक्टरों से कई बार गुहार लगाई, लेकिन न तो समय पर इलाज मिला और न ही किसी बड़े अस्पताल में रेफर किया गया। देर रात महिला की हालत गंभीर हो गई। आखिरकार उसकी मौत हो गई। अस्पताल प्रशासन ने इसे “जटिलता” बताकर पल्ला झाड़ लिया।
अंतिम संस्कार के बाद चौंकाने वाला खुलासा
महिला के निधन के बाद गांव में मातम पसरा था। अगले दिन अंतिम संस्कार किया गया। लेकिन कुछ समय बाद जब चिता की राख को एकत्र किया जा रहा था, तभी परिजनों की नजर एक धातु की वस्तु पर पड़ी। पास जाकर देखा तो वह एक सर्जिकल कैंची थी। यह वही कैंची बताई जा रही है, जिसका इस्तेमाल ऑपरेशन के दौरान किया जाता है।
गांव में हंगामा, सड़क पर उतरे लोग
कैंची मिलने की खबर आग की तरह फैल गई। देखते ही देखते ग्रामीणों की भीड़ जुट गई। गुस्साए लोगों ने अस्पताल प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी। सड़क जाम कर दिया गया। लोगों का आरोप था कि ऑपरेशन के दौरान महिला के शरीर में कोई औजार छोड़ा गया, जिससे उसकी हालत बिगड़ी और मौत हो गई।
प्रशासन की सफाई, जांच के आदेश
मामले के तूल पकड़ते ही प्रशासन हरकत में आया। स्वास्थ्य अधिकारियों ने बयान जारी कर कहा कि घटना की जांच कराई जाएगी। एक उच्चस्तरीय समिति गठित करने की बात कही गई। संबंधित डॉक्टरों और स्टाफ से जवाब तलब किया गया है। हालांकि परिजन इस सफाई से संतुष्ट नहीं हैं। उनका कहना है कि यह सिर्फ लापरवाही नहीं, बल्कि सीधी हत्या है।
सवालों के घेरे में सरकारी योजनाएं
यह घटना सिर्फ एक परिवार की त्रासदी नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम पर सवाल है। नसबंदी जैसे संवेदनशील ऑपरेशन को लक्ष्य पूरा करने की होड़ में कैसे किया जा रहा है, यह घटना उसकी भयावह तस्वीर पेश करती है। क्या मरीजों की जान से ज्यादा आंकड़े महत्वपूर्ण हो गए हैं? क्या गरीब और ग्रामीण महिलाओं को प्रयोगशाला का चूहा समझ लिया गया है?
न्याय की मांग
मृतका के पति और परिजन दोषियों की गिरफ्तारी और कड़ी सजा की मांग कर रहे हैं। साथ ही सरकार से मुआवजे और बच्चों के भविष्य की सुरक्षा की गुहार लगाई है। गांव के लोग भी अब एकजुट होकर न्याय की लड़ाई लड़ने की बात कह रहे हैं।
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एक मौत, कई सवाल
चिता की राख से निकली कैंची ने सिर्फ एक ऑपरेशन की गलती नहीं दिखाई, बल्कि उस व्यवस्था की पोल खोल दी, जो भरोसे के नाम पर जिंदगियां निगल रही है। जब तक दोषियों पर सख्त कार्रवाई नहीं होगी, तब तक ऐसी घटनाएं रुकने वाली नहीं हैं। यह वक्त है कि सिस्टम जागे, वरना अगली चिता से क्या निकलेगा, कोई नहीं जानता।
