पंचायत के नाम पर खुलेआम हिंसा, पुरानी रंजिश ने लिया खूनी रूप; वायरल वीडियो ने गांव से लेकर प्रशासन तक मचाया हड़कंप
मुजफ्फरनगर। छपार में पति-पत्नी के बीच चल रहे विवाद को सुलझाने के लिए पंचायत बुलाई गई। यहां बात बिगड़ गई और दोनों पक्षों में पथराव-मारपीट हो गई। गांव की पंचायत आमतौर पर समझौते और फैसलों के लिए जानी जाती है, लेकिन इस बार पंचायत का नाम लेते ही लोगों के जेहन में दहशत और खूनखराबे की तस्वीरें तैर गईं। सोशल मीडिया पर सामने आया एक वीडियो पूरे इलाके में सनसनी फैला रहा है, जिसमें करीब 50-50 लोग आमने-सामने खड़े नजर आते हैं। बात इतनी बढ़ जाती है कि बहस हाथापाई में बदल जाती है और फिर खुलेआम हिंसा शुरू हो जाती है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इस बवाल में महिलाएं भी निशाने पर आ जाती हैं।
वीडियो में देखा जा सकता है कि पंचायत के नाम पर लोग एक जगह जमा हैं। शुरुआत में दोनों पक्षों के बीच तेज बहस होती है। आवाजें ऊंची होती जाती हैं, गालियां चलती हैं और माहौल देखते-देखते बेकाबू हो जाता है। अचानक दोनों ओर से लोग एक-दूसरे की तरफ बढ़ते हैं। लाठी-डंडे और ईंटें उठ जाती हैं। कुछ ही पलों में पूरा मैदान रणभूमि में बदल जाता है।
सबसे ज्यादा झकझोर देने वाला दृश्य तब सामने आता है, जब कुछ लोग महिलाओं को पकड़कर उनके सिर पर ईंटें मारते दिखाई देते हैं। महिलाएं खुद को बचाने की कोशिश करती हैं, चीख-पुकार मच जाती है, लेकिन हिंसा करने वालों पर किसी तरह का डर या संकोच नजर नहीं आता। आसपास खड़े लोग या तो तमाशबीन बने रहते हैं या खुद झगड़े में कूद पड़ते हैं। वीडियो में किसी तरह की रोक-टोक या पंचायत का अनुशासन कहीं नजर नहीं आता।
स्थानीय लोगों के मुताबिक, विवाद की जड़ पुरानी रंजिश बताई जा रही है। जमीन, आपसी लेन-देन और गांव के वर्चस्व को लेकर पहले भी दोनों पक्षों में तनातनी रही है। पंचायत बुलाई गई थी ताकि मामला शांतिपूर्वक सुलझ सके, लेकिन पंचायत खुद हिंसा का मंच बन गई। गांव के बुजुर्ग और जिम्मेदार लोग, जो आमतौर पर बीच-बचाव करते हैं, इस बार हालात संभाल नहीं पाए।
वीडियो सामने आने के बाद इलाके में डर का माहौल है। लोग घरों से निकलने में भी हिचक रहे हैं। खासतौर पर महिलाएं खुद को असुरक्षित महसूस कर रही हैं। कई परिवारों ने बच्चों को स्कूल भेजना भी बंद कर दिया है। गांव में तनाव की स्थिति बनी हुई है और किसी भी वक्त हालात फिर बिगड़ने का डर है।
पुलिस और प्रशासन की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं। बताया जा रहा है कि वीडियो वायरल होने के बाद पुलिस हरकत में आई है और मामले की जांच शुरू कर दी गई है। कुछ लोगों की पहचान कर पूछताछ की जा रही है, जबकि वीडियो के आधार पर कार्रवाई की बात कही जा रही है। प्रशासन का दावा है कि दोषियों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा।
सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि यह घटना सिर्फ एक गांव की नहीं, बल्कि पूरे समाज के लिए चेतावनी है। पंचायत जैसी परंपरागत व्यवस्था, जो कभी न्याय और संवाद का माध्यम मानी जाती थी, अब कई जगह ताकत और दबदबे का जरिया बनती जा रही है। अगर समय रहते इस पर रोक नहीं लगी, तो ऐसी घटनाएं और बढ़ सकती हैं।
इस घटना ने एक बार फिर सोशल मीडिया की ताकत भी दिखाई है। वीडियो वायरल न होता तो शायद मामला गांव की चारदीवारी में ही दब जाता। अब जब पूरा देश इसे देख रहा है, तो सवाल उठ रहे हैं क्या पंचायतें कानून से ऊपर हैं? क्या महिलाओं की सुरक्षा सिर्फ कागजों तक सीमित है? और क्या समाज हिंसा को यूं ही देखता रहेगा?
See also this: सुजड़ू में गणतंत्र दिवस धूमधाम से मनाया, मदरसा फैजुल इस्लाम में फहराया गया तिरंगा
फिलहाल गांव में पुलिस की निगरानी बढ़ा दी गई है। प्रशासन शांति बनाए रखने की अपील कर रहा है, लेकिन लोगों के मन में डर और गुस्सा दोनों मौजूद हैं। यह खूनी पंचायत सिर्फ एक घटना नहीं, बल्कि सिस्टम और समाज दोनों के लिए आईना है, जो दिखा रहा है कि अगर संवाद की जगह हिंसा ने ले ली, तो नतीजे कितने खतरनाक हो सकते हैं।