दंपती से अभद्रता करने वाली महिला दरोगा लाइन हाजिर
वर्दी का रौब पड़ा भारी दंपती से अभद्रता करने वाली महिला दरोगा लाइन हाजिर, वायरल वीडियो के बाद गिरी गाज
मेरठ। उत्तर प्रदेश पुलिस की छवि को धूमिल करने वाला एक वीडियो सामने आने के बाद आखिरकार विभाग को सख्त कदम उठाना पड़ा है। मेरठ के प्रसिद्ध बॉम्बे बाजार क्षेत्र में कार सवार एक दंपती से कथित रूप से अभद्रता और दुर्व्यवहार करने वाली महिला दरोगा रतना राठी को लाइन हाजिर कर दिया गया है। यह कार्रवाई सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने और जनता में आक्रोश फैलने के बाद की गई।
मामले की गंभीरता को देखते हुए मेरठ पुलिस द्वारा प्रारंभिक रिपोर्ट तैयार कर अलीगढ़ के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) को भेजी गई थी। इसके बाद अलीगढ़ एसएसपी ने मेरठ एसएसपी की संस्तुति पर तत्काल प्रभाव से महिला दरोगा के खिलाफ विभागीय कार्रवाई करते हुए उन्हें लाइन हाजिर करने का आदेश दिया।
क्या है पूरा मामला?
घटना मेरठ के बॉम्बे बाजार इलाके की बताई जा रही है, जहां एक कार में सवार पति-पत्नी किसी निजी कार्य से जा रहे थे। इसी दौरान महिला दरोगा रतना राठी ने उन्हें रोका। आरोप है कि बिना किसी ठोस कारण के दरोगा ने दंपती से ऊंची आवाज में बात की और अपशब्दों का प्रयोग किया।
वायरल वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि महिला दरोगा वर्दी का रौब दिखाते हुए कार सवार दंपती से अभद्र भाषा में बातचीत कर रही हैं। वीडियो में दंपती बार-बार शांत रहने और बात को सुलझाने की कोशिश करते दिखाई देते हैं, लेकिन महिला दरोगा का रवैया आक्रामक बना रहता है।
महिला दरोगा का वीडियो वायरल होते ही मचा हड़कंप
घटना का वीडियो किसी राहगीर या स्वयं दंपती द्वारा रिकॉर्ड किया गया, जो कुछ ही घंटों में सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया। वीडियो वायरल होते ही पुलिस विभाग में हड़कंप मच गया। आम जनता के साथ-साथ सामाजिक संगठनों और बुद्धिजीवियों ने भी महिला दरोगा के व्यवहार की कड़ी निंदा की।
लोगों का कहना था कि पुलिस का काम कानून की रक्षा करना है, न कि आम नागरिकों को डराना या अपमानित करना। कई यूजर्स ने सवाल उठाया कि अगर वर्दी में तैनात अधिकारी ही इस तरह का व्यवहार करेंगे तो आम नागरिक किससे न्याय की उम्मीद करें?
वरिष्ठ अधिकारियों ने लिया संज्ञान
मामले की गंभीरता को देखते हुए मेरठ एसएसपी ने तत्काल वीडियो की जांच के आदेश दिए। प्राथमिक जांच में वीडियो को वास्तविक पाया गया और महिला दरोगा का व्यवहार विभागीय नियमों के विपरीत माना गया।
दंपती से अभद्रता करने वाली महिला दरोगा लाइन हाजिर
इसके बाद मेरठ एसएसपी ने पूरे प्रकरण की रिपोर्ट तैयार कर अलीगढ़ एसएसपी को भेजी और महिला दरोगा के खिलाफ सख्त कार्रवाई की संस्तुति की। रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया कि वर्दी में रहते हुए इस प्रकार का व्यवहार पुलिस की छवि को नुकसान पहुंचाने वाला है।
महिला दरोगा का लाइन हाजिर होने का क्या मतलब?
लाइन हाजिर का अर्थ है कि संबंधित अधिकारी को फील्ड ड्यूटी से हटाकर पुलिस लाइन में तैनात कर दिया गया है। इस दौरान वह किसी भी थाने या सार्वजनिक स्थान पर कार्य नहीं कर सकेगा/सकेगी। साथ ही, उनके खिलाफ विभागीय जांच की प्रक्रिया भी शुरू की जा सकती है।
सूत्रों के अनुसार, महिला दरोगा रतना राठी के खिलाफ आगे अनुशासनात्मक कार्रवाई भी की जा सकती है। जांच में दोष सिद्ध होने पर वेतन कटौती, पदावनति या निलंबन जैसी कार्रवाई भी संभव है।
पुलिस विभाग की सख्त चेतावनी
इस मामले के बाद पुलिस विभाग ने स्पष्ट संदेश दिया है कि किसी भी अधिकारी द्वारा वर्दी का दुरुपयोग बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि कानून सभी के लिए समान है, चाहे वह आम नागरिक हो या पुलिसकर्मी।
एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा पुलिस को जनता का सेवक माना जाता है। यदि कोई अधिकारी इस मर्यादा का उल्लंघन करता है तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
जनता की प्रतिक्रिया
इस कार्रवाई के बाद आम लोगों ने राहत की सांस ली है। सोशल मीडिया पर कई लोगों ने पुलिस प्रशासन के इस कदम की सराहना की है। लोगों का मानना है कि इस तरह की कार्रवाई से अन्य पुलिसकर्मियों को भी सबक मिलेगा और वे जनता से व्यवहार करते समय संयम बरतेंगे।
हालांकि, कुछ लोगों ने यह भी कहा कि केवल लाइन हाजिर करना पर्याप्त नहीं है और दोषी पाए जाने पर कठोर विभागीय दंड दिया जाना चाहिए।
मेरठ के बॉम्बे बाजार में हुई यह घटना एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर करती है कि वर्दी की गरिमा बनाए रखना कितना आवश्यक है। महिला दरोगा रतना राठी को लाइन हाजिर किया जाना यह संदेश देता है कि पुलिस विभाग अब ऐसे मामलों में लापरवाही नहीं बरतेगा।
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यह मामला न केवल पुलिस व्यवस्था के लिए चेतावनी है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि सोशल मीडिया अब जवाबदेही तय करने का एक मजबूत माध्यम बन चुका है। यदि पुलिस और प्रशासन जनता का विश्वास बनाए रखना चाहते हैं, तो उन्हें ऐसे मामलों में निष्पक्ष और त्वरित कार्रवाई करनी ही होगी।
