Meerut चौकाने वाला बदलाव! एलएलएम की सीटें 1640 से घटकर हुईं 740
Meerut चौकाने वाला बदलाव! एलएलएम की सीटें 1640 से घटकर हुईं 740
मेरठ: चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय (CCSU) के एलएलएम (LLM) पाठ्यक्रम में इस बार छात्रों को बड़ी चुनौती का सामना करना पड़ेगा। विश्वविद्यालय प्रशासन ने एलएलएम की कुल सीटों में भारी कटौती कर दी है। पिछले शैक्षणिक सत्र में जहां 1640 सीटें थीं, वहीं अब इन्हें घटाकर केवल 740 कर दिया गया है। इसके साथ ही फीस और आवेदन शुल्क में भी इजाफा कर दिया गया है, जिससे छात्रों को दोहरी मार झेलनी पड़ रही है।
विश्वविद्यालय प्रशासन का तर्क है कि नेशनल एजुकेशन पॉलिसी (एनईपी) के तहत पाठ्यक्रमों की गुणवत्ता बढ़ाने और मानकों को दुरुस्त करने के लिए यह फैसला लिया गया है। लेकिन शिक्षाविद और छात्र संगठनों का कहना है कि यह कदम छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ है।
एलएलएम कोर्स की लोकप्रियता लगातार बढ़ रही थी और बड़ी संख्या में छात्र इसमें दाखिला ले रहे थे। इस कटौती से अब सैकड़ों छात्रों को बाहर रह जाना पड़ेगा या उन्हें दूसरे विश्वविद्यालयों का रुख करना होगा।
एलएलएम कोर्स के लिए इस बार फीस में करीब 20 प्रतिशत का इजाफा किया गया है। इसके अलावा, आवेदन शुल्क भी पहले के मुकाबले बढ़ा दिया गया है। जहां पहले आवेदन शुल्क ₹750 था, अब इसे ₹1000 कर दिया गया है।
छात्रों का कहना है कि पहले ही महंगाई ने कमर तोड़ रखी है और अब उच्च शिक्षा तक पहुंच भी कठिन होती जा रही है। इस तरह की नीतियां मेधावी लेकिन आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों के लिए एक और बाधा बन सकती हैं।
सीसीएसयू से संबद्ध लगभग दो दर्जन कॉलेजों में एलएलएम की पढ़ाई होती थी। सीटों की कटौती से अधिकतर कॉलेजों को या तो एलएलएम कोर्स बंद करना पड़ेगा या फिर सीमित सीटों के लिए संघर्ष करना पड़ेगा।
विशेष रूप से मेरठ, बागपत, गाजियाबाद, बुलंदशहर, शामली और हापुड़ के कॉलेज इससे सीधे प्रभावित होंगे। कुछ कॉलेजों ने पहले ही आवेदन न लेने की घोषणा कर दी है।
एनएसयूआई, एबीवीपी और अन्य छात्र संगठनों ने इस फैसले का विरोध किया है। उनका कहना है कि यह शिक्षा के अधिकार का उल्लंघन है और विश्वविद्यालय को यह फैसला वापस लेना चाहिए। कई छात्र संघ नेताओं ने कुलपति से मुलाकात कर ज्ञापन भी सौंपा है।
एक छात्र नेता ने कहा, “हमने मेहनत से एलएलबी पूरी की है, अब आगे की पढ़ाई करना चाहते हैं, लेकिन सीटें इतनी कम कर दी गई हैं कि ज्यादातर को मौका ही नहीं मिलेगा। यह सरासर अन्याय है।”
एलएलएम में दाखिले के लिए अब पहले से ज्यादा कड़ी प्रतिस्पर्धा होगी। सीमित सीटों के कारण प्रवेश परीक्षा में अधिक स्कोर लाना जरूरी होगा। साथ ही कॉलेजों द्वारा चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखने की भी चुनौती बढ़ेगी।
विश्वविद्यालय प्रशासन का कहना है कि यह फैसला फिलहाल एक शैक्षणिक सत्र के लिए लागू किया गया है और भविष्य में छात्रों की प्रतिक्रिया और मांग के आधार पर पुनर्विचार किया जा सकता है।
हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि उच्च शिक्षा के ऐसे महत्वपूर्ण पाठ्यक्रम में अचानक और भारी बदलाव करने से छात्रों का भरोसा डगमगाता है।
चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय द्वारा एलएलएम की सीटों में भारी कटौती और फीस वृद्धि से छात्रों में असंतोष व्याप्त है। जहां एक ओर शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने की बात कही जा रही है, वहीं दूसरी ओर सैकड़ों छात्र इससे उच्च शिक्षा से वंचित हो सकते हैं। छात्रों, अभिभावकों और शैक्षिक संगठनों को अब एकजुट होकर इस विषय पर खुली बहस और समाधान की ओर बढ़ना होगा