पाक एयरबेस पर छिपे ईरानी विमान अमेरिकी दावा वायरल indianewstv.in
अमेरिका-ईरान संघर्ष के बीच बड़ा दावा, पाकिस्तान के एयरबेस पर छिपाए गए ईरानी विमान
वॉशिंगटन। मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के बीच एक अमेरिका की रिपोर्ट ने पूरी दुनिया में हलचल मचा दी है। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि Pakistan ने हालिया US-Iran Conflict के दौरान ईरानी सैन्य विमानों को अपने एयरबेस पर शरण दी। इस खुलासे के बाद पाकिस्तान की भूमिका को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सवाल उठने लगे हैं।
अमेरिकी रिपोर्ट में क्या दावा किया गया?
अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स और CBS News के हवाले से कहा गया कि पाकिस्तान ने ईरानी सैन्य विमानों को संभावित अमेरिकी हमलों से बचाने के लिए अपने एयरबेस इस्तेमाल करने की अनुमति दी। रिपोर्ट के अनुसार कुछ ईरानी विमान पाकिस्तान के रणनीतिक महत्व वाले नूर खान एयरबेस पर खड़े किए गए थे।
रिपोर्ट सामने आते ही वॉशिंगटन में राजनीतिक हलकों में हलचल बढ़ गई। कई अमेरिकी नेताओं ने पाकिस्तान की “तटस्थ मध्यस्थ” की भूमिका पर सवाल उठाए हैं।
पाकिस्तान ने क्या कहा?
इन दावों के बाद पाकिस्तान सरकार ने बयान जारी कर कहा कि अमेरिकी मीडिया की रिपोर्ट “भ्रामक” है। हालांकि पाकिस्तान ने यह स्वीकार किया कि कुछ ईरानी विमान उसके एयरबेस पर मौजूद थे, लेकिन उसने इसे किसी सैन्य गठजोड़ या अमेरिकी विरोधी कदम से जोड़ने से इनकार किया।
पाकिस्तान का कहना है कि यह स्थिति क्षेत्रीय सुरक्षा और आपात परिस्थितियों से जुड़ी हो सकती है, न कि किसी गुप्त सैन्य सहयोग से।
क्यों बढ़ रही है चिंता?
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि रिपोर्ट सही साबित होती है तो यह अमेरिका और पाकिस्तान के संबंधों पर असर डाल सकती है। हाल के महीनों में पाकिस्तान खुद को अमेरिका और ईरान के बीच “शांति मध्यस्थ” के रूप में पेश कर रहा था। ऐसे में यह दावा उसकी विश्वसनीयता पर सवाल खड़े कर रहा है।
अमेरिकी सांसदों ने इस मुद्दे पर विस्तृत जांच की मांग भी शुरू कर दी है।
मिडिल ईस्ट में लगातार बढ़ रहा तनाव
United States और Iran के बीच पिछले कुछ महीनों से तनाव लगातार बढ़ रहा है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़, तेल सप्लाई और सैन्य कार्रवाई को लेकर दोनों देशों के बीच कई बार टकराव की स्थिति बन चुकी है।
हालिया रिपोर्टों में दावा किया गया कि ईरान ने अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया, जबकि अमेरिका ने जवाबी कार्रवाई में ईरानी सैन्य ठिकानों पर हमले किए।
चीन और अफगानिस्तान का भी जिक्र
कुछ रिपोर्ट्स में यह भी कहा गया कि ईरानी विमानों को केवल पाकिस्तान ही नहीं बल्कि अफगानिस्तान के कुछ क्षेत्रों में भी अस्थायी रूप से रखा गया था। वहीं चीन के साथ ईरान की बढ़ती नजदीकियों पर भी चर्चा तेज हो गई है।
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वैश्विक राजनीति पर असर
विशेषज्ञों का कहना है कि यह मामला केवल एयरबेस तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे पूरी क्षेत्रीय राजनीति प्रभावित हो सकती है। यदि पाकिस्तान पर लगे आरोप सही साबित होते हैं तो अमेरिका की विदेश नीति और दक्षिण एशिया की कूटनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।
दूसरी ओर, पाकिस्तान लगातार खुद को शांति वार्ता और सीजफायर का समर्थक बता रहा है। ऐसे में आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर और बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।