फास्ट फूड से एक और मौत बर्गर और नूडल्स का अत्यधिक सेवन बना जानलेवा
लगातार जंक फूड (फास्ट फूड) खाने की आदत बनी जानलेवा, डॉक्टरों ने बताया किशोरों के लिए गंभीर खतरा
लखनऊ/कानपुर। उत्तर प्रदेश में फास्ट फूड के अत्यधिक सेवन से जुड़ा एक और चौंकाने वाला मामला सामने आया है। इस बार मामला एक होनहार छात्रा की असमय मौत से जुड़ा है, जिसने पूरे परिवार के साथ-साथ स्वास्थ्य विभाग को भी सोचने पर मजबूर कर दिया है। बताया जा रहा है कि लगातार बर्गर, नूडल्स और पैकेट वाले जंक फूड के सेवन के कारण छात्रा के दिमाग में गांठें (ब्रेन लीज़न/ट्यूमर जैसी स्थिति) बन गईं, जिससे उसकी मौत हो गई।
पढ़ाई में तेज, लेकिन आदतें बनीं दुश्मन
मृतक छात्रा 17 वर्ष की थी और यूपी के एक मध्यमवर्गीय परिवार से ताल्लुक रखती थी। वह इंटरमीडिएट की पढ़ाई कर रही थी और पढ़ाई में काफी तेज मानी जाती थी। परिवार के अनुसार, छात्रा को बचपन से ही बाहर का खाना बेहद पसंद था। स्कूल से लौटते समय या ट्यूशन के बाद वह अक्सर बर्गर, नूडल्स, पिज्जा और चिप्स जैसे फास्ट फूड खा लिया करती थी।
शुरुआत में परिवार ने इसे सामान्य शौक समझकर नजरअंदाज किया, लेकिन धीरे-धीरे यह उसकी रोजमर्रा की आदत बन गई। घर का खाना वह कम ही खाती थी और ज्यादातर समय इंस्टेंट नूडल्स या फास्ट फूड पर निर्भर रहती थी।
फास्ट फूड: सिरदर्द और चक्कर से शुरू हुई परेशानी
करीब छह महीने पहले छात्रा को तेज सिरदर्द और बार-बार चक्कर आने की शिकायत होने लगी। कभी-कभी उसे उल्टी भी होती थी। परिवार ने पहले इसे पढ़ाई का दबाव और मोबाइल का ज्यादा इस्तेमाल समझा। स्थानीय डॉक्टर से इलाज कराया गया, लेकिन कोई खास सुधार नहीं हुआ।
कुछ समय बाद उसकी हालत और बिगड़ने लगी। उसे याददाश्त में कमी, आंखों के सामने अंधेरा छाने और अचानक बेहोश होने जैसी समस्याएं होने लगीं। इसके बाद परिजन उसे एक बड़े अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां जांच के बाद जो सामने आया, उसने सभी को झकझोर दिया।
ब्रेन स्कैन में हुआ खुलासा
डॉक्टरों ने जब छात्रा का सीटी स्कैन और एमआरआई कराया तो पता चला कि उसके दिमाग में कई गांठें बन चुकी हैं। मेडिकल रिपोर्ट में दिमाग में सूजन और असामान्य कोशिकाओं की वृद्धि की बात सामने आई। डॉक्टरों का कहना था कि यह स्थिति अचानक नहीं बनी, बल्कि लंबे समय से चली आ रही गलत खान-पान की आदतों का नतीजा हो सकती है।
इलाज के दौरान छात्रा की हालत लगातार नाजुक होती चली गई। तमाम कोशिशों के बावजूद आखिरकार उसने दम तोड़ दिया।
डॉक्टरों की चेतावनी: जंक फूड फास्ट फूड बना रहा बीमार
इस मामले पर न्यूरोलॉजिस्ट और पोषण विशेषज्ञों ने गंभीर चिंता जताई है। डॉक्टरों का कहना है कि अत्यधिक प्रोसेस्ड फूड, जिनमें प्रिज़र्वेटिव, ट्रांस फैट, अत्यधिक नमक और स्वाद बढ़ाने वाले केमिकल्स होते हैं, लंबे समय तक सेवन करने से शरीर पर घातक असर डाल सकते हैं।
विशेषज्ञों के मुताबिक, ऐसे फूड दिमाग की कोशिकाओं को प्रभावित कर सकते हैं, हार्मोनल असंतुलन पैदा करते हैं और सूजन संबंधी बीमारियों को जन्म देते हैं। बच्चों और किशोरों में इसका असर और भी तेजी से देखने को मिलता है, क्योंकि इस उम्र में शरीर और दिमाग दोनों विकास की अवस्था में होते हैं।
पहले भी सामने आ चुके हैं ऐसे मामले
यह कोई पहला मामला नहीं है। इससे पहले भी यूपी और देश के अन्य हिस्सों से जंक फूड के अत्यधिक सेवन से जुड़ी कई गंभीर घटनाएं सामने आ चुकी हैं। कहीं मोटापा, कहीं दिल की बीमारी तो कहीं कम उम्र में डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर के मामले बढ़ते जा रहे हैं। अब दिमाग से जुड़ी गंभीर बीमारियों का इस तरह सामने आना चिंता को और बढ़ा रहा है।
माता-पिता और स्कूलों की भूमिका पर सवाल
इस घटना के बाद एक बार फिर माता-पिता और शैक्षणिक संस्थानों की भूमिका पर सवाल उठने लगे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि बच्चों के खान-पान पर सिर्फ घर में ही नहीं, बल्कि स्कूल और कॉलेज स्तर पर भी सख्त निगरानी होनी चाहिए।
स्कूल कैंटीन में बिकने वाले जंक फूड, इंस्टेंट नूडल्स और शुगर ड्रिंक्स पर नियंत्रण की मांग भी उठ रही है। कई सामाजिक संगठनों ने सरकार से अपील की है कि बच्चों के लिए स्वास्थ्यवर्धक भोजन को बढ़ावा देने के लिए ठोस नीति बनाई जाए।
परिवार का दर्द और समाज के लिए सबक
मृतक छात्रा के माता-पिता का कहना है कि अगर उन्हें पहले इस खतरे का अंदाजा होता तो वे कभी भी बेटी को इस तरह का खाना खाने नहीं देते। परिवार आज गहरे सदमे में है और उनकी आंखों में एक ही सवाल है क्या समय रहते सही जानकारी और जागरूकता होती तो उनकी बेटी की जान बच सकती थी?
विशेषज्ञों की सलाह
पोषण विशेषज्ञों का कहना है कि फास्ट फूड पूरी तरह छोड़ना शायद संभव न हो, लेकिन इसका सेवन सीमित और संतुलित होना बेहद जरूरी है। घर का ताजा खाना, फल-सब्जियां, दालें और पर्याप्त पानी शरीर के लिए सबसे सुरक्षित हैं। बच्चों को शुरू से ही स्वस्थ खान-पान की आदतें सिखानी चाहिए।
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यूपी में सामने आया यह मामला सिर्फ एक छात्रा की मौत की कहानी नहीं है, बल्कि यह पूरे समाज के लिए चेतावनी है। बदलती जीवनशैली और जंक फूड की बढ़ती लत किस तरह धीरे-धीरे जिंदगी छीन सकती है, इसका यह दर्दनाक उदाहरण है। अब जरूरत है कि समय रहते हम सचेत हों, नहीं तो ऐसी खबरें और भी बढ़ सकती हैं।
