जलसा-ए-इस्लाह-ए-मुआशरा
जलसा-ए-इस्लाह-ए-मुआशरा में हज़रत मौलाना सैयद अहमद आदिल साहब बतौर मेहमान-ए-ख़ुसूसी हुए शामिल
लुधियाना / 22 अगस्त । जमीयत उलेमा ज़िला लुधियाना के बैनर तले जलसा-ए-इस्लाह-ए-मुआशरा मदनी मस्जिद गुलाबी बाग़ में आयोजित किया गया। क़ारी मोहम्मद सुफ़ियान क़ासमी की तिलावत और क़ारी मुजाहिदुल इस्लाम बिजनौरी (इमाम व ख़तीब मदनी मस्जिद गुलाबी बाग़) की नात-ए-नबी ﷺ से जलसे की शुरुआत हुई।
हज़रत मौलाना सैयद अहमद आदिल साहब दामत बरकातहुम (नायब सदर मजलिस तहफ़्फ़ुज़ ख़त्म-ए-नुबुव्वत पंजाब और सेक्रेटरी जमीयत उलेमा मुत्तहिदा पंजाब) बतौर मेहमान-ए-ख़ुसूसी शरीक हुए।

मुफ्ती शुऐब आलम क़ासमी कुटेसरवी (नाज़िम इस्लाह-ए-मुआशरा जमीयत उलेमा ज़िला लुधियाना) ने अपने तिहाई ख़िताब में इस्लाह-ए-मुआशरा की ज़रूरत, इफ़ादियत और मुसलमानों की मौजूदा सूरत-ए-हाल का ज़िक्र करते हुए कहा:
हमारे समाज में सूदख़ोरी, वालिदैन की बे-हुरमती, ज़िना, शादियों में बे-हयाई, दहेज जैसी बुरी बीमारी, तलाक़ में जल्दबाज़ी, नौजवानों की दीन से दूरी, तालीमी लिहाज़ से पसमांदगी और ख़ास तौर पर दीनी तालीम से हद दर्जा ग़फ़लत — ये तमाम ख़राबियां हैं जो हमारे समाज को कमज़ोर और खोखला कर रही हैं।
हम पूरी दुनिया में सिर्फ़ इसलिए ज़लील व रुस्वा हो रहे हैं क्योंकि हमने इस्लामी तहज़ीब से हटकर ज़िंदगी गुज़ारनी शुरू कर दी है। जमीयत उलेमा इन आंतरिक कमज़ोरियों को समाज के लिए बेहद घातक समझती है और इन्हें दूर करने की हर मुमकिन कोशिश शोबा-ए-इस्लाह-ए-मुआशरा के तहत करती है।
मेहमान-ए-ख़ुसूसी *हज़रत मौलाना सैयद अहमद आदिल साहब* दामत बरकातहुम ने अपने ख़िताब में इस बात पर ज़ोर दिया कि हमें क़ुरआनी तालीमात से मज़बूती के साथ जुड़ना होगा, यही तमाम मसाइल का हल है। जब तक हम क़ुरआन के अहकाम से दूर रहेंगे, दुनिया में ज़लील व ख़्वार होते रहेंगे।
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इस मौके पर जमीयत उलेमा हल्का गुलाबी बाग़ के तमाम ज़िम्मेदारान, मास्टर मोहम्मद आफ़ताब (सदर हल्का गुलाबी बाग़), क़ारी मुजाहिदुल इस्लाम साहब (नाज़िम इस्लाह-ए-मुआशरा, इमाम व ख़तीब मस्जिद हाज़ा), हाफ़िज़ मोहम्मद हाशिम, क़ारी ग़यूर अहमद साहब (सदर जमीयत उलेमा ज़िला लुधियाना), हाजी मोहम्मद यूनुस, अब्दुल ग़फ़्फ़ार, नदीम भाई सैफ़ी, मोहम्मद रफ़ीक़, हाजी सरफ़राज़, अबुल कलाम, हाफ़िज़ ज़ुबैर, मोहम्मद साबिर, हाजी ग़ुलाम सरवर फ़गवाड़ा के अलावा बड़ी तादाद में लोगों ने शिरकत की।
